शुद्ध वर्तनी शब्द PDF सहित — हिंदी के 300+ शुद्ध और अशुद्ध शब्द

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शुद्ध वर्तनी शब्द PDF सहित

शुद्ध वर्तनी शब्द सूची PDF सहित

परीक्षा की दृष्टि से शुद्ध और अशुद्ध शब्द


शुद्ध वर्तनी शब्द – अच्छी हिंदी बोलने व लिखने के लिए जरूरी है शुद्ध वर्तनी की पहचान का होना, इसके अभाव में हम अक्सर गलतियाँ करते हैं, उच्चारण करते समय वाचन संबंधी अशुद्धि और लिखते समय वर्तनी संबंधी अशुद्धि। हम जिस देवनागरी लिपि में हिंदी भाषा बोलते व लिखते हैं, उसका शुद्ध उच्च्चारणशुद्ध वर्तनी की पहचान होनी बहुत जरूरी है अन्यथा अर्थ का अनर्थ होने में देरी नहीं लगती जैसे – चिंता का चिता।

यह बात मन से निकाल देनी चाहिए कि, हिंदी सीखने की आवश्यकता नहीं है। शुद्ध और अच्छी हिंदी बोलने-लिखने के लिए यह आवश्यक है कि, हम शब्दों और वाक्यों का शुद्ध प्रयोग सीखें। भ्रम और अज्ञान के कारण भाषा में अनेक अशुद्धियाँ होती हैं। इसीलिए इस लेख में हम इसी वर्तनी संबंधी अशुद्धियों को दूर करने का प्रयास करेंगे साथ ही शुद्ध और अशुद्ध वर्तनी शब्दों की सूची PDF सहित उपलब्ध कराएंगे।


वर्तनी क्या/किसे कहते हैं

वर्णों के सार्थक क्रम में लिखने की रीति को ‘वर्तनी’ कहा जाता है। इसे ‘अक्षरी’ या ‘हिज्जे’ (Spelling) भी कहा जाता है। वर्तनी का सीधा संबंध उच्चारण से है, हिंदी में जो बोला जाता है वही लिखा भी जाता है। यदि उच्चारण अशुद्ध होगा तो वर्तनी भी अशुद्ध होगी।

प्रायः अपनी मातृभाषा या बोली के कारण या व्याकरण संबंधी अभाव के कारण वर्तनी में अशुद्धियाँ आ जाती हैं लेकिन सही ज्ञान होने से वर्तनी को शुद्ध भी किया जा सकता है। चलिए विस्तार में जानते हैं –

 

हिंदी वर्तनी का मानकीकरण

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 1961 ई. में एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त की थी। इस समिति ने अप्रैल, 1962 ई. में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत् की, जिन्हें सरकार ने स्वीकृत किया। इन्हें 1967 ई. में ‘हिंदी वर्तनी का मानकीकरण’ शीर्षक पुस्तिका में व्याख्या तथा उदाहरण सहित प्रकाशित किया गया था। लेकिन इनका व्यापक प्रचार-प्रसार न हो पाने के कारण आज भी देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी के मानक रूप का प्रयोग नहीं हो पा रहा है।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ‘वर्तनी समिति’ ने  1962 ई. में तथा हिंदी के व्याकरणाचार्यों द्वारा वर्तनी सुधार संबंधी नियम जो सुझाए गए हैं, वे निम्नलिखित है :-

 

वर्तनी शुद्धि के नियम –

शुद्ध वर्तनी के इन नियमों को पढ़ लोगे तो कभी परीक्षाओं में गलतियाँ नहीं करोगे।

  • हिंदी के विभक्ति-चिह्न, सर्वनाम शब्दों को छोड़कर शेष सभी प्रसंगों में, शब्दों से अलग लिखे जाएँ। जैसे – सीता ने कहा, राम को। सर्वनाम में – तुमने, आपको, मुझसे । अपवाद – यदि सर्वनाम शब्दों के साथ दो विभक्ति चिह्न हों, तो उनमें पहला सर्वनाम से मिला हुआ और दूसरा अलग लिखा जाए। जैसे – उसके लिए, इनमें से।
  • तक, साथ आदि अव्यय अलग लिखे जाएँ । जैसे – आपके साथ, यहाँ तक।
  • पूर्वकालिक प्रत्यय ‘कर’  क्रिया से मिलाकर लिखा जाए । जैसे –  मिलाकर, खाकर, पीकर।
  • द्वंद्व समास पदों के बीच हाइफन (योजक चिह्न) का प्रयोग किया जाना चाहिए। जैसे – राम-लक्ष्मण, शिव-पार्वती।
  • सा, जैसा आदि सारूप्यवाचकों के पूर्व योजक-चिह्न का प्रयोग किया जाना चाहिए। जैसे – तुम-सा, राम-जैसा।
  • संस्कृतमूलक तत्सम शब्दों की वर्तनी में सामान्यतः संस्कृत वाला रूप ही रखा जाए। किंतु, जिन शब्दों के प्रयोग में हिंदी में हलंत का चिह्न लुप्त हो चुका है, उनमें हलंत लगाने की कोशिश न की जाए। जैसे – महान, विद्वान, जगत। किंतु संधि या छंद समझाने की स्थिति हो, तो इन्हें हलंत रूप में ही रखना होगा । जैसे – जगत् + नाथ, विद्वान् + लिखति।
  • जहाँ वर्गों के पंचमाक्षरों के बाद उसी वर्ग के शेष चार वर्णों में से कोई वर्ण हो वहाँ अनुस्वार का ही प्रयोग किया जाए । जैसे – वंदना, नंद, नंदन, अंत, गंगा, संपादक आदि।
  • नहीं, मैं, हैं, में इत्यादि के ऊपर लगी मात्राओं को छोड़कर शेष आवश्यक स्थानों पर चंद्रबिंदु का प्रयोग करना चाहिए, नहीं तो हंस और हँस तथा अँगना और अंगना में अर्थभेद स्पष्ट नहीं होगा।
  • अरबी-फारसी के वे शब्द जो, हिंदी के अंग बन चुके हैं और जिनका विदेशी ध्वनियों का हिंदी ध्वनियों में रूपांतर हो चुका है, उन्हें हिंदी के रूप में ही स्वीकार किया जाए। जैसे – जरूर, कागज आदि। किंतु, जहाँ उनका शुद्ध विदेशी रूप में प्रयोग अभीष्ट हो, वहाँ उनके हिंदी में प्रचलित रूपों में यथास्थान ‘नुक्ते’ का प्रयोग किया जाए। ताकि उनका विदेशीपन स्पष्ट रहे। जैसे – फ़ारसी, ज़मीन।
  • अंग्रेजी के जिन शब्दों में अर्द्ध ‘ओ’ ध्वनि का प्रयोग होता है, उनके शुद्ध रूप का हिंदी में प्रयोग अभीष्ट होने पर ‘आ’ की मात्रा पर अर्द्धचंद्र का प्रयोग किया जाए। जैसे – डॉक्टर, कॉलेज, हॉस्पिटल।
  • संस्कृत के जिन शब्दों में विसर्ग का प्रयोग होता है, वे यदि तत्सम रूप में प्रयुक्त हों तो विसर्ग का प्रयोग अवश्य किया जाए। जैसे – स्वान्तः सुखाय, प्रातःकाल, दुःख। परंतु यदि उस शब्द के तद्भव रूप में विसर्ग का लोप हो चुका है, तो उस रूप में विसर्ग के बिना भी काम चालाया जा सकेगा ।
  • कुछ शब्दों का अंतिम स्वर ह्रस्व इ ही होना चाहिए जो बोलचाल में दीर्घ ई हो गए हैं। उदाहरण – निधी, अंजली, उक्ती, अतिथी, समिती, भारवी आदि के शुद्ध रूप – निधि, अंजलि, उक्ति, अतिथि, भारवि ही होना चाहिए।
  • संस्कृत के शब्दों में चंद्रबिंदु का प्रयोग नहीं होता क्योंकि वहाँ स्वरों का उच्चारण अनुनासिकतामय नहीं है। जबकि अनुस्वार एवं अनुनासिक व्यंजन युक्त शब्द हिंदी में अनुनासिक में बदल गए हैं। जैसे – अन्धकार से अँधेरा, ग्रंथि से गाँठ, बंध से बाँध आदि।
  • शब्द के प्रारम्भ में दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ आदि) के आने पर अनुनासिक/चंद्रबिंदु का प्रयोग होता है। उदाहरण – आँख, गाँधी, आँधी, आँसू, मूँछ तथा राँगा आदि।
  • संस्कृत के कुछ शब्दों में इत प्रत्यय लगा देने से अशुद्धि हो जाती है। उदाहरण – क्रोधित, अभिशापित, आकर्षित, प्रफुल्लित, हतोत्साहित शब्द अशुद्ध हैं और इनका शुद्ध रूप  होगा – क्रुद्ध, अभिशप्त, आकृष्ट, प्रफुल्ल और हतोत्साह।
  • हिंदी में स्वर रहित र् अर्थात् रेफ जहाँ उच्चारित होता है वह उसके आगे वाले व्यंजन पर लगाया जाता है। उदाहरण – परिवर्तन, अंतर्गत, सार्थक, स्वार्थी, आशीर्वाद।
  • संस्कृत के कुछ पुल्लिंग शब्दों का स्त्रीलिंग रूप ‘इनी‘ प्रत्यय लगाने से बनता है न कि, नी प्रत्यय लगाने से। जैसे –  संन्यासी से संन्यासिनी , सर्प से सर्पिणी और विरह से विरहिणी बनेगा जबकि, संन्यासनी, सर्पणी,  विरहणी अशुद्ध होगा।
  • हिंदी में भविष्यत् काल में क्रिया का पुल्लिंग बहुवचन रूप  एंगे प्रत्यय से बनता है। जैसे – करे से करेंगे, पढ़ से पढेंगे, लिख से लिखेंगे।
  • संस्कृत से कुछ शब्दों की विशिष्ट संरचना होती है, जैसे – कवि का स्त्रीलिंग कवयित्री, अनुवाद का अनूदित और रचना करने वाले के लिए प्रचलित शब्द रचयिता है।
  • मूर्धन्य केवल संस्कृत शब्दों में आता है। जैसे – गवेषणा, भाषा, कषाय, चषक आदि।
  • ट वर्ग से पूर्व केवल मूर्धन्य ष आता है। जैसे – षोडश, षडानन, कष्ट आदि।
  • कुछ शब्दों के वैकल्पिक रूप होते हैं: जैसे – कोश – कोष, केशर – केसर, कौशल्या – कौसल्या, केशरी – केसरी, कशा – कषा, वशिष्ठ – वसिष्ठ। ये दोनों शब्द शुद्ध हैं।

हिंदी भाषा की शुद्ध वर्तनी के लिए इन नियमों को ठीक से आपको समझ लेना चाहिए, ताकि जब भी कोई शब्द बोलें या लिखें तो अशुद्धि न होने पाए। यहाँ पर हिंदी में प्रचलित वर्तनी संबंधी मुख्य शुद्ध और अशुद्ध शब्दों की सूची दी जा रही है, जिसके अंत में आपको शुद्ध और अशुद्ध शब्दों की PDF भी उपलब्ध हो सकेगी। यह सूची परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को संज्ञान में रख कर तैयार की गई है, आशा है इस वर्तनी संबंधी शुद्ध और अशुद्ध शब्दों की सूची से आपको बहुत मदद मिलेगी।


सामान्य हिंदी के लिए उपयोगी पुस्तकें


शुद्ध और अशुद्ध शब्द सूची

शुद्ध वर्तनी शब्द

शुद्ध वर्तनी शब्द

शुद्ध वर्तनी की यह सूची, जिनमें हमने शुद्ध और अशुद्ध शब्दों को एक साथ रखा है। परीक्षाओं की तैयारी में आपकी बहुत मदद करेगी, इनमें शुद्ध वर्तनी के उन शब्दों को तो शामिल किया ही है जो विगत परीक्षाओं में अधिकतम प्पूरश्छेन्रूप में गए हैं, साथ ही इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है जो आगामी परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं, उम्मीद है आपके लिए ये शुद्ध वर्तनी संबंधी शब्द लाभदायक सिद्ध होंगे । सूची इस प्रकार है -
अशुद्ध शब्दशुद्ध शब्द
अंतर्चेतनाअंतश्चेतना
अंधेराअँधेरा
अंत्येष्ठिअंत्येष्टि
अकस्मातअकस्मात्
अगमअगम्य
अधिशाषीअधिशासी
अट्टारीअट्टालिका
अड़यलअड़ियल
अभ्यारण्यअभयारण्य
अनेकोंअनेक
अनुदितअनूदित
अनुगृहअनुग्रह
अनुग्रहितअनुगृहीत
अर्थातअर्थात्
अंतकरणअंतःकरण
अंतर्ध्यानअंतर्धान
अंतर्रात्माअंतरात्मा
अंताक्षरीअंत्याक्षरी
अत्योक्तिअत्युक्ति
अधःगतिअधोगति
अधोपतनअधःपतन
अभिष्टअभीष्ट
अनाधिकारअनधिकार
अष्टवक्रअष्टावक्र
अमावसअमावस्या/अमावास्या
अधःवस्त्रअधोवस्त्र
अपरान्हअपराह्न
अहिल्याअहल्या
अक्षोहिणीअक्षौहिणी
अक्षुण्यअक्षुण्ण
अनुवादितअनूदित
अन्तर्कथाअंतःकथा
अनुशरणअनुसरण
आधिक्यताआधिक्य
असाढ़आषाढ़
अँकुरअंकुर
आंसूआँसू
आईयेआइए
आरोग्यताआरोग्य
आकर्षितआकृष्ट
अपन्हुतिअपह्नुति
आकर्षितआकृष्ट
आल्हादआह्लाद
अँगनाअंगना
अधगतिअधोगति
अधतलअधस्तल
इक्षाईक्षा
इतिपूर्वंइतःपूर्व
अनाधिकारअनधिकार
अनापेक्षितअनपेक्षित
अहोरात्रिअहोरात्र
अतिश्योक्तिअतिशयोक्ति
इप्सितईप्सित
इकठ्ठाइकट्ठा
बिमारीबीमारी
दिवालीदीवाली
निहारिकानीहारिका
महाबलिमहाबली
निसंदेहनिःसंदेह/निस्संदेह
यानियानी
निःसंकनिश्शंक
उपरोक्तउपर्युक्त
निस्कलंकनिष्कलंक
ऊषाऊषा
नुपुरनूपुर
उज्वलउज्ज्वल
उलंघनउल्लंघन
उष्माऊष्मा
उर्मिऊर्मि
एतरेयऐतरेय
एच्छिकऐच्छिक
औदार्यताऔदार्य/उदारता
सुईसूई
न्यौछावरन्योछावर
ऋषिकेशहृषीकेश
त्यौहारत्योहार
श्रृंगारशृंगार
झौंपड़ीझोंपड़ी
संग्रहीतसंगृहीत
कनीनकाकनीनिका
श्रृंखलाशृंखला
कंटीलाकँटीला
कनिष्टकनिष्ठ
करूणाकरुणा
कलसकलश
किंचितकिंचित्
कारवाहीकार्यवाही/कार्रवाही
कवियत्रीकवयित्री
कुमुदनीकुमुदिनी
कुतुहलकौतूहल/कुतूहल
कैलाशकैलास
कोमलांगिनीकोमलांगी
खंबाखंभा
ग्रसितग्रस्त
गौरवतागौरव/गुरुता
गूंजगूँज
गांधीगाँधी
घनिष्टघनिष्ठ
चाहियेचाहिए
चाक्षुसचाक्षुष
चिन्हचिह्न
चिंगारीचिनगारी
चातुर्यताचतुरता/चातुर्य
च्युत्च्युत
छठवाँछठा
ज्योत्सनाज्योत्स्ना
जरूरतज़रूरत
चाक्षुसचाक्षुष
जुखामजुकाम
चिन्हचिह्न
जागृतजाग्रत/जागरित
झांसीझाँसी
ढ़ोलकचतुरता/ढोलक
डमरुडमरू
बूढाबूढ़ा
मेढ़कमेढक
तत्त्वाधानतत्त्वावधान
तादात्मयतादात्म्य
तदानुकूलतदनुकूल
तदोपरांततदुपरांत
त्रिमासिकत्रैमासिक
तस्तरीतश्तरी
दयालूदयालु
दंपतिदंपती
दाँयादायाँ
दीयासलाईदियासलाई
दोगुनादुगुना
दृढ़वतीदृढ़व्रत
दैन्यतादैन्य
द्वारिकाद्वारका
द्रष्टव्यदृष्टव्य
दांतदाँत
धैर्यताधैर्य/धीरता
धाताव्यध्यातव्य
धनाड्यधनाढ्य
नाँवनाव
नर्कनरक
नयीनई
निरावलंबनिरवलंब
निरूत्साहितनिरुत्साह
निर्लोभीनिर्लोभ
फिटकरीफिटकिरी
निरानुनासिकनिरनुनासिक
निरोगनीरोग
निरालंकृतनिरलंकृत
निहारिकानीहारिका
निसंकोचनिस्संकोच/निःसंकोच
निस्कलंकनिष्कलंक
निसंदेहनिस्संदेह/निःसंदेह
निःसंकनिश्शंक
नुपुरनूपुर
परिप्रेक्षपरिप्रेक्ष्य
भूगौलिकभौगोलिक
पश्चातापपश्चात्ताप
पद्मावत्पद्मावत
परिवेक्षणपर्यवेक्षण
परिषदपरिषद्
परलौकिकपारलौकिक
पिशाचिनीपिशाची
पुरुस्कारपुरस्कार
पुनरोक्तिपुनरुक्ति
पृथकपृथक्
परिशिष्ठपरिशिष्ट
पूज्यनीयपूजनीय
पौरुषत्वपुरुषत्त्व/पौरुष
प्रणयनीप्रणयिनी
प्रदर्शिनीप्रदर्शनी
प्रियदर्शनीप्रियदर्शिनी
प्रतिद्वंदप्रतिद्वंद्व
प्रत्यार्पणप्रत्यर्पण
फैंकनाफेंकना
फिटकरीफिटकिरी
इमानदारीईमानदारी
बांझबाँझ
बहुबहू
बाल्मीकीवाल्मीकि
बाहुल्यताबाहुल्य/बहुलता
बनवन
बृज/व्रजब्रज
भगीरथीभागीरथी
भर्तसनाभर्त्सना
भाग्यवानभाग्यवान्
मंत्रीमंडलमंत्रिमंडल
मनोकामनामनःकामना
महानतामहत्ता
महात्म्यमाहात्म्य
माँसमांस
मानवीयकरणमानवीकरण
मिष्ठानमिष्टान्न
मैथलीशरणमैथिलीशरण
मूर्छामूर्च्छा
मुहुर्तमुहूर्त
मोक्षदायनीमोक्षदायिनी
याज्ञवल्कयाज्ञवल्क्य
यौवनावस्थायुवावस्था
यानियानी
यूँयों
यशगानयशोगान
यशलाभयशोलाभ
रचियतारचयिता
रांगाराँगा
राजाभिषेकराज्याभिषेक
राजनैतिकराजनीतिक
रोड़रोड
लघुत्तरलघूत्तर
लब्धप्रतिष्ठितलब्धप्रतिष्ठ
लाजवतीलाजवंती
लावण्यतालावण्य
वाँछनीयवांछनीय
विजीगिषाविजिगीषा
वासुकीवासुकि
धोकाधोखा
पुनरावलोकनपुनरवलोकन
वेदेहीवैदेही
वधुवधू
विसन्नविषण्ण
विरहणीविरहिणी
विदेशिकवैदेशिक
वाहनीवाहिनी
वरिष्टवरिष्ठ
विच्छनविच्छिन्न
बुभूक्षाबुभुक्षा
वेषभूषावेशभूषा
व्यावहरितव्यवहृत
व्यंगोक्तिव्यंग्योक्ति
शारिरिकशारीरिक
शांतमयशांतिमय
शूर्पनखाशूर्पणखा
शमशानश्मशान
शुरुशुरू
श्रीमतिश्रीमती
श्रुतिलिपिश्रुतलिपि
श्रोतस्रोत
श्रापशाप
षड़दर्शनषडदर्शन
षटमुखषण्मुख
षटमासषण्मास
षटाननषडानन
षष्टिषष्ठी
षोड़शीषोडशी
सौन्दर्यतासुंदरता
सोजन्यतासौजन्य
सृजकसर्जक
स्थायीत्वस्थायित्व
सोचनीयशोचनीय
स्थायीस्थाई
सौहार्द्रसौहार्द
स्वामीभक्तस्वामिभक्त
सुश्रूषाशुश्रूषा
सकुशलतापूर्वककुशलतापूर्वक/सकुशल
स्वर्गरोहणस्वर्गारोहण
स्वास्तिकस्वस्तिक
स्वंयवरस्वयंवर
साईकिलसाइकिल
संदीपनीसंदीपनि
सादरपूर्वकसादर/आदरपूर्वक
संक्षिप्तकरणसंक्षिप्तीकरण
स्तनपानस्तन्यपान
सारथीसारथि
सारिणीसारणी
सिपाईसिपाही
सीड़ीसीढ़ी
सुदामिनीसौदामिनी
सूंडसूँड
सृष्टास्रष्टा
सन्यासीसंन्यासी
संप्रदायिकतासांप्रदायिकता
सामाग्रीसामग्री
हिरण्यकश्यपहिरण्यकशिपु
हीरनहरिण/हिरण
हाथिन/हथिनीहथनी
हस्ताक्षेपहस्तक्षेप
हतोत्साहितहतोत्साह
षटऋतुषड्ऋतु
तरुछायातरुच्छाया
मनोकामनामनःकामना
यशलाभयशोलाभ
रीत्यानुसाररीत्यनुसार
विद्युतचालकविद्युच्चालक
राजऋषिराजर्षि
दुरावस्थादुरवस्था
मनोकष्टमनःकष्ट
इतिपूर्वंइतःपूर्व
अधतलअधस्तल
मनज्ञमनोज्ञ
महाराजामहाराज
मंत्रीवरमंत्रिवर
उधमऊधम
कुमुदनीकुमुदिनी
कनिष्टकनिष्ठ
कुँआकुआँ
गत्यार्थगत्यर्थ
छिद्रान्वेशीछिद्रान्वेषी
छिपकिलीछिपकली
दैदीप्यमानदेदीप्यमान
दुवन्नीदुअन्नी
प्रार्दुर्भावप्रादुर्भाव
पयोपानपयःपान
पुनरुत्थानपुनरूत्थान
प्राणीमात्रप्राणिमात्र
बहुबहू
भुक्कड़भुक्खड़
भाषाईभाषायी
भाष्करभास्कर
वासुकीवासुकि
शुद्धिकरणशुद्धीकरण
सांस्कृत्यायनसांकृत्यायन
युधिष्ठरयुधिष्ठिर
आनुषांगिकआनुषंगिक

आशा है शुद्वध वर्तनी शब्दों की यह सूची आपकी बहुत-सी त्रुटियों को सुधारने में सहायक सिद्ध रही होगी, यदि आप शुद्ध वर्तनी की PDF Download करना चाहते हैं तो नीचे दी गई PDF File पर क्लिक कर Download कर सकते हैं, ब्लॉग पर आपने के लिए आपका शुक्रिया, परीक्षाओं की यदि अआप तैयारी कर रहे हैं हमारे सोशल एकाउंट्स से जरूर जुड़ना – Instagram Facebook Page & Facebook Group Telegram

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