अवधपुरी में राम बाल रामायण (पाठ 1 – Class 6th Hindi)

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अवधपुरी में राम बाल रामायण

अवधपुरी में राम बाल रामायण

Class 6th Hindi Chapter 1

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अवधपुरी में राम बाल रामायण

कक्षा६ / 6th 

विषयहिन्दी 

पुस्तकबाल रामकथा / बाल रामायण 

पाठ का नामअवधपुरी में राम (पाठ १)

अवधपुरी में राम नामक पाठ के शब्दार्थ, पाठ का सारांश एवं पाठ  के प्रश्न-उत्तर इस लेख में प्रस्तुत् किया जा रहा है, कक्षा ६ हिन्दी की पाठ्यपुस्तक – बाल रामकथा /रामायण का यह पहला पाठ है, अर्थग्रहण की दृष्टि से पाठ के शब्दार्थ, पाठ का सार, एवं महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर जो आपको ‘अवधपुरी में राम’ नामक पाठ को संक्षेप में लेकिन सरलता से समझने योग्य होंगे। प्रस्तुत् है –


अवधपुरी में राम पाठ के शब्दार्थ :-

दर्शनीय = देखने योग्य, देखने लायक़, भव्यता = सुंदरता, अंतरे – भीतर तक, विपन्नता = ग़रीबी, विलक्षण = अद्भुत्, पुत्रेष्टि यज्ञ = पुत्र की इच्छा के लिए किया जाने वाला यज्ञ, उत्तराधिकारी = वारिस, पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति आदि का हक़दार, रीति-नीति = काम करने का ढंग, यशस्वी – प्रसिद्ध, सताता = दुःखी करता, मंगलगीत = बधाई के गीत, मनोकामना = मन की कामना या इच्छा । सम्मान = आदर, दक्ष = निपुण, कुशल। अर्जित करना = प्राप्त करना, कुशाग्र बुद्धि = तेज बुद्धि वाला – (सरलार्थ = कुश के अग्र भाग जैसी नुकीली या तेज़ बुद्धि वाला) पारंगत = चतुर, कुशल, दक्ष, निपुण। सिद्धि = किसी कार्य में विशेष सफलता प्राप्त करना । अनुष्ठान = धार्मिक कार्य, बिजली गिरना = बहुत बड़ा संकट आना, अचकचाना = घबरा जाना, दुविधा = असमंजस, अनिष्ट = हानि, संवाद =बातचीत, विनती = प्रार्थना, प्रतिक्रिया = किसी बात (या क्रिया) के परिणामस्वरूप की गई क्रिया। व्यक्त करना = प्रकट करना, भभक उठा = भड़क उठा। सकते में आना = भौचक्का होना, डर जाना, बरताव = व्यवहार, पेश आना, आग्रह करना = प्रार्थना या अनुरोध करना, नितांत = बिल्कुल, स्वस्तिवाचन = मंगल वाचन, आशीर्वाद के वचन। विलंब = देर, बेहद = ऊबड़-खाबड़, तूणीर = तरकश।


अवधपुरी में राम पाठ का सारांश :-

अवध में सरयू नदी के किनारे अयोध्या नामक एक बहुत ही सुंदर और भव्य नगर था। उसकी सुंदरता देखने लायक़ थी। अयोध्या के केवल महल ही नहीं, अपितु वहाँ की प्रजा के घर भी बहुत भव्य और सुंदर थे। दुःख और विपन्नता का जैसे अयोध्या में पता ही नहीं था।

अयोध्या कोसल देश की राजधानी थी। वहाँ के राजा दशरथ थे। राजा दशरथ न्यायप्रिय, यशस्वी तथा वीर शासक थे। उन्हें किसी वस्तु की कोई कमी नहीं थी, परंतु संतान न होने के कारण वह बहुत दुःखी थे। एक बार राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ से संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी । 

राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ महर्षि ऋष्यशृंग से करवाया। कुछ समय पश्चात् राजा दशरथ की तीन रानियों ने पुत्रों को जन्म दिया। कौशल्या ने चैत्र मास नवमी के दिन राम को जन्म दिया। रानी सुमित्रा के दो पुत्र लक्ष्मण लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए तथा कैकेयी ने भरत को जन्म दिया।

चारों राजकुमार (राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत) बहुत सुंदर थे। उनमें आपस में बहुत प्रेम था। चारों जब साथ खेलने निकलते तो लोग इन्हें देखते ही रह जाते थे। तीनों छोटे राजकुमार (लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न) सदैव अपने बड़े भाई का कहना मानते थे। लक्ष्मण सदैव अपने भाई राम के साथ रहते थे इसलिए खेल में राम-लक्ष्मण और भरत-शत्रुघ्न की जोड़ी बन जाती थी। 

एक दिन महर्षि विश्वमित्र अयोध्या आए। राजा दशरथ ने उनसे आने का कारण पूछा। तब विश्वमित्र ने राजा दशरथ को बताया कि वह एक सिद्धियज्ञ करने जा रहे हैं, जिसमें राक्षस बाधा डाल सकते हैं। अतः उन्हें अपनी रक्षा के लिये राम की आवश्यकता है। राजा दशरथ ने विश्वमित्र से कहा कि, राम तो अभी केवल सोलह वर्ष के हैं। वे मायावी राक्षसों से कैसे किस प्रकार युद्ध कर पाएँगे। यदि आप चाहें तो मैं अपनी सेना सहित आपके साथ चल सकता हूँ। 

महर्षि ने राजा दशरथ से कहा कि, यदि वे राम को उनके साथ नहीं भेज सकते हैं तो वह उनके महल से ख़ाली हाथ लौट जाएँगे और ऐसा होने पर रघुकुल की ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ की नीति खंडित हो जाएगी। महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ से कहा कि, महर्षि विश्वामित्र एक सिद्ध पुरुष हैं, उनके होते हुए राम का बाल भी बाँका नहीं हो सकता, उनके साथ रहकर राम अनेक गुप्त विद्याएँ भी सीख जाएँगे क्योंकि, विश्वामित्र अनेक गुप्त विद्याओं के महारथी हैं। 

ऐसी दशा में राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ के समझाने पर राम को विश्वामित्र के साथ भेजने की बात मान ली लेकिन उन्होंने लक्ष्मण को भी साथ ले जाने की बात कही। राम और लक्ष्मण को राज्यसभा में बुलाया गया । दोनों राजकुमार महर्षि विश्वामित्र के साथ जाने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। बीहड़ और भयानक जंगल में महर्षि आगे-आगे चल रहे थे, उनके पीछे-पीछे राम और राम के कुछ कदम की दूरी पर लक्ष्मण चल रहे थे और उनकी कमर में उनकी तलवारें लटक रहीं थीं। 

शेष भाग पाठ २ में पढ़ेंगे….. (बाल रामायण से)


अवधपुरी में राम बाल रामायण (पाठ १)

प्रश्न – उत्तर

प्रश्न १:- अवध कौन-सी नदी के किनारे स्थित था ? 

उत्तर :- सरयू नदी 

प्रश्न २:- अवध किस राज्य की राजधानी थी?

उत्तर :- कोसल 

प्रश्न ३:-अवध के राजा कौन थे ?

उत्तर :- राजा दशरथ 

प्रश्न ५:- राजा दशरथ की कितनी रानियाँ थीं?

उत्तर :- तीन – कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा।

प्रश्न ६:- पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने कौन सा यज्ञ करवाया था?

उत्तर :- पुत्रेष्टि यज्ञ ।

प्रश्न ७:- पुत्रेष्टि यज्ञ किस महर्षि ने संपन्न कराया था?

उत्तर :- महर्षि ऋष्यशृंग ने 

प्रश्न ८:- राजा दशरथ के कितने पुत्र थे?

उत्तर :- चार – राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न।

प्रश्न ९:- राम की माता का क्या नाम था?

उत्तर :- कौशल्या 

प्रश्न १०:- भरत की माता का क्या नाम था ? 

उत्तर :- कैकेयी 

प्रश्न ११:- लक्ष्मण और शत्रुघ्न की माता का क्या नाम था?

उत्तर :- सुमित्रा 

प्रश्न १२:- खेलकूद में लक्ष्मण अक्सर किसके साथ रहते थे?

उत्तर :- राम के साथ 

प्रश्न १३:- राम में कौन-से गुण थे?

उत्तर :- विवेक, शालीनता और न्यायप्रियता।

प्रश्न १४:- महर्षि विश्वामित्र के आश्रम का नाम क्या था ?

उत्तर :- सिद्धाश्रम 

प्रश्न १५:- महर्षि विश्वामित्र राज दशरथ के पास क्यों आये थे?

उत्तर :- महर्षि विश्वामित्र को एक यज्ञ करना था, जिसमें दो राक्षस बाधा डाल रहे थे, वे राज दशरथ के पास राम को कुछ दिन के लिये अपने साथ ले जाने के लिए आये थे ।


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